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पहले तीन महीनों में शिशà¥à¤“ं में गैस होना आम है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि तब उनकी आंतें पूरी तरह विकसित हो रही होती हैं। छह से 12 महीने ​के शिशà¥à¤“ं में à¤à¥€ ये आम है, कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि वे बहà¥à¤¤ से अलग-अलग à¤à¥‹à¤œà¤¨à¤¾ पहली बार आजमा रहे होते हैं।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर कà¥à¤¯à¤¾ है?
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वाटर à¤à¤• à¤à¤¸à¤¾ घोल है जिसका उदà¥à¤¦à¥‡à¤¶à¥à¤¯ बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ में पेट फूलना, उदरशूल, अपच, हिचकी और दाà¤à¤¤ निकलते समय दरà¥à¤¦ के कारण होने वाली बेचैनी को शांत करना है। इस घोल के अलग-अलग पà¥à¤°à¤•ार उपलबà¥à¤§ हैं, और इनमें विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ जड़ी-बूटियों का मिशà¥à¤°à¤£ है।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर में कà¥à¤¯à¤¾ पाया जाता है?
सौंफ, अदरक, कैमोमाइल, मà¥à¤²à¥‡à¤ ी, दालचीनी, और लेमन बाम कà¥à¤› à¤à¤¸à¥‡ ततà¥à¤µ हैं जो गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर में पाठजाते हैं। मूल रूप से इस घोल की सामगà¥à¤°à¥€ में पानी, अलà¥à¤•ोहल, सोआ बीज का तेल, चीनी और सोडियम बाइकारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ शामिल होते हैं। कà¥à¤› बà¥à¤°à¤¾à¤‚डों में गà¥à¤²à¤¿à¤¸à¤°à¥€à¤¨ का à¤à¥€ उपयोग किया जाता हैं। माता-पिता और डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की आपतà¥à¤¤à¤¿à¤¯à¥‹à¤‚ के बाद अब गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर में अलà¥à¤•ोहल का उपयोग बंद कर दिया गया है। कà¥à¤› बà¥à¤°à¤¾à¤‚डों को कृतà¥à¤°à¤¿à¤® मिठास का उपयोग करने के लिठà¤à¥€ जाना जाता है जो बचà¥à¤šà¥‡ के सà¥à¤µà¤¾à¤¸à¥à¤¥à¥à¤¯ के लिठहानिकारक हो सकते हैं। पà¥à¤¦à¥€à¤¨à¥‡ का तेल कà¥à¤› à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड में पाया जा सकता है। नारंगी या सà¥à¤Ÿà¥à¤°à¥‰à¤¬à¥‡à¤°à¥€ जैसे विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ सà¥à¤µà¤¾à¤¦à¥‹à¤‚ में गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर उपलबà¥à¤§ है।
कà¥à¤¯à¤¾ गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठसà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ है?
कोई ठोस सबूत नहीं है जो यह साबित कर सके कि बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठगà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¿à¤¤ नहीं है। इस बात पर कई अलग-अलग राय है कि कà¥à¤¯à¤¾ गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर पà¥à¤°à¤à¤¾à¤µà¥€ है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि कà¥à¤› ने इसे अपने बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ के लिठउपयोगी पाया है जबकि अनà¥à¤¯ ने नहीं। जहाठतक सà¥à¤°à¤•à¥à¤·à¤¾ की बात है, शिशà¥à¤“ं के लिठअलà¥à¤•ोहल, कृतà¥à¤°à¤¿à¤® मिठास या सोडियम बाइकारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ की सलाह नहीं दी जाती है।
सोडियम बाइकारà¥à¤¬à¥‹à¤¨à¥‡à¤Ÿ: बेकिंग सोडा के रूप में à¤à¥€ जाना जाता है, इससे दूध-कà¥à¤·à¤¾à¤° सिंडà¥à¤°à¥‹à¤® हो सकता है जो खून में कैलà¥à¤¶à¤¿à¤¯à¤® की मातà¥à¤°à¤¾ में वृदà¥à¤§à¤¿ का कारण बनता है। चूंकि छह महीने से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को सिरà¥à¤« माठका दूध या पाउडर वाला दूध दिया जाता है, इसलिठउनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ इस सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ का अधिक खतरा होता है, जिससे किडनी की à¤à¥€ समसà¥à¤¯à¤¾ हो सकती है।
सोआ बीज का तेल: यह à¤à¤• वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ तेल है जो कि अपच से राहत पà¥à¤°à¤¦à¤¾à¤¨ करता है। हालांकि, कà¥à¤› शिशà¥à¤“ं को इससे à¤à¤²à¤°à¥à¤œà¥€ हो सकती है, इसलिठइस पà¥à¤°à¤•ार की सामगà¥à¤°à¥€ का उपयोग करते समय सावधानी बरतनी चाहिà¤à¥¤
पà¥à¤°à¤¾à¤•ृतिक सामगà¥à¤°à¥€ और शिशॠआहार संरचना के बारे में बढ़ती जागरूकता के बावजूद, कà¥à¤› बà¥à¤°à¤¾à¤‚डों के निरà¥à¤®à¤¾à¤£ में पैराबेंस, वनसà¥à¤ªà¤¤à¤¿ कारà¥à¤¬à¤¨ या डेयरी उतà¥à¤ªà¤¾à¤¦ शामिल हो सकते हैं जिनका उपयोग नहीं की जानी चाहिà¤à¥¤ डॉकà¥à¤Ÿà¤°à¥‹à¤‚ की राय à¤à¥€ इस बात पर विà¤à¤¾à¤œà¤¿à¤¤ है कि कà¥à¤¯à¤¾ शिशà¥à¤“ं को गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर दिया जा सकता है। बाजार में विà¤à¤¿à¤¨à¥à¤¨ बà¥à¤°à¤¾à¤‚ड हैं और शिशà¥à¤“ं को वही दिया जाना चाहिठजो उनकी सà¥à¤¥à¤¿à¤¤à¤¿ के लिठसबसे उपयà¥à¤•à¥à¤¤ हो।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर का कà¥à¤¯à¤¾ उपयोग है
कहा जाता है कि गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर शिशà¥à¤“ं में पाचन संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾à¤à¤‚ और हिचकियां कम करने में बहà¥à¤¤ लाà¤à¤¦à¤¾à¤¯à¤• होता है। जिन शिशà¥à¤“ं को पेट फूलने और साथ ही à¤à¤¸à¤¿à¤¡à¤¿à¤Ÿà¥€ जैसी जठरांतà¥à¤° संबंधी समसà¥à¤¯à¤¾ होते हैं, उनà¥à¤¹à¥‡à¤‚ à¤à¥€ इसका सेवन करने से फायदा हो सकता है। जिन बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ का दाà¤à¤¤ निकलना शà¥à¤°à¥‚ होता है वे चिड़चिड़े होते हैं और बहà¥à¤¤ रोते हैं। जिस कारण उनके पेट में काफी हवा जाती है जिससे बाद में पेट फूल सकता है। हिचकी जो डायफà¥à¤°à¤¾à¤® उतà¥à¤¤à¥‡à¤œà¤¿à¤¤ होने से होती है, शिशà¥à¤“ं को परेशान कर सकती है और पेट फूलना, à¤à¤¸à¤¿à¤¡ रिफà¥à¤²à¤•à¥à¤¸ या अपच के कारण होती है। गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर डायफà¥à¤°à¤¾à¤® को राहत दिलाने के लिठजाना जाता है और इस तरह से बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को हिचकी से राहत मिलती है।
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर का कà¥à¤¯à¤¾ उपयोग है
बचà¥à¤šà¥‡ गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर कब पी सकते हैं?
गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर के निरà¥à¤®à¤¾à¤¤à¤¾ दावा करते हैं कि यह दो सपà¥à¤¤à¤¾à¤¹ के शिशà¥à¤“ं को à¤à¥€ दिया जा सकता है। हालांकि, à¤à¤• महीने से कम उमà¥à¤° के बचà¥à¤šà¥‹à¤‚ को इसे देना उचित नहीं है कà¥à¤¯à¥‹à¤‚कि उनका पाचन तंतà¥à¤° अà¤à¥€ à¤à¥€ विकसित हो रहा होता है और संवेदनशील हो सकता है। à¤à¤¸à¥‡ लोग à¤à¥€ हैं जो यह मानते हैं कि शिशà¥à¤“ं को छह महीने तक माठके दूध या पाउडर वाले दूध के अलावा कà¥à¤› नहीं दिया जाना चाहिà¤à¥¤ तो, शिशॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर देने के संबंध में अपने बाल रोग विशेषजà¥à¤ž से परामरà¥à¤¶ करना सबसे अचà¥à¤›à¤¾ विकलà¥à¤ª है।
बचॠको गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर कैसे दें?
बचà¥à¤šà¥‡ को थोड़ा गà¥à¤°à¤¾à¤‡à¤ª वॉटर देने का सबसे अचà¥à¤›à¤¾ समय दूध पिलाने के लगà¤à¤— दस मिनट बाद का है। à¤à¤• डà¥à¤°à¥‰à¤ªà¤° या à¤à¤• चमà¥à¤®à¤š का उपयोग करके बचà¥à¤šà¥‡ को दिया जा सकता है और इसके अचà¥à¤›à¥‡ सà¥à¤µà¤¾à¤¦ के कारण, अधिकांश बचà¥à¤šà¥‡ बिना कोई उपदà¥à¤°à¤µ मचाठइसे पी जाà¤à¤‚गे। यह आमतौर पर दिन में à¤à¤• बार दिया जाता है लेकिन अपने डॉकà¥à¤Ÿà¤° से जरूर सलाह लें।
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